लखनऊ। राजधानी के पूर्व भ्रष्ट जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार पांड़े ने जिस शिक्षा माफिया ललित श्रीवास्तव को अपनी चहेती प्रिंसिपल रागिनी मिश्रा की फर्जी आख्या पर जाते-जाते सरस्वती गर्ल्स इंटर कॉलेज का मैनेजर बना दिया था, उसी चपरासी से शिक्षा माफिया बने ललित श्रीवास्तव के ऊपर मुकदमा चलाने की स्वीकृति को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक ने पत्र भेज दिया है। चूंकि चपरासी से क्लर्क और फिर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड का सदस्य बना ललित श्रीवास्तव माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में भी काम कर चुका था, ऐसे में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की स्वीकृति भी जरूरी है, इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने मण्डलीय सयुक्त शिक्षा निदेशक, लखनऊ डॉ प्रदीप सिंह को पत्र भेजकर 28 जुलाई 2026 को अपराह्न 01:00 बजे अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में बुलाया है।
प्रताप सिंह बघेल ने अपने पत्र में लिखा है कि ललित कुमार श्रीवास्तव, पुत्र स्व. विक्रमजीत लाल के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति के सम्बन्ध में 16 जुलाई, 2026 का बेसिक शिक्षा निदेशक सन्दर्भ ग्रहण करें, जिसके द्वारा पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाधार निवारण संगठन उप्र के पत्र 19 जून 2026 के क्रम में ललित कुमार श्रीवास्तव पुत्र स्व. विक्रमजीत लाल चपरासी से पूर्व वरिष्ठ लिपिक, कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति देने का अनुरोध किया है।
प्रश्नगत प्रकरण के सम्बन्ध में 28 जुलाई 2026 को अपराह्न 01:00 बजे अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक बुलाई गई है। अतः आपसे अनुरोध है कि उक्त बैठक में सूचनाओं सहित ससमय प्रतिभाग करें। इस मामले में बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना है कि ललित कुमार का मामला सेंटिनियल इंटर कॉलेज का ही है। यह कॉलेज माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आता है ऐसे में माध्यमिक शिक्षा विभाग को भी तय करना है कि अभियोजन की स्वीकृति देनी थी इसलिए उन्होंने पत्र माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल को भेज दिया था।
सेंटिनियल इंटर कॉलेज के फर्जीवाड़े में नहीं हुई ललित पर करवाई
लखनऊ। सेंटिनियल इंटर कॉलेज में फर्जी ढंग से प्राइवेट कॉलेज खोलने के मामले ने तूल पकड़ा और तत्कालीन डीआईओएस डॉ मुकेश कुमार सिंह, तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ.अमरकांत सिंह (अब स्वर्गीय) और तत्कालीन एडी बेसिक पीएन सिंह का एक साथ सस्पेंशन किया गया था, लेकिन चपरासी से बाबू बने ललित कुमार पर आंच तक नहीं आई थी। सूत्र बताते हैं कि पिछले 5 वर्षों तक जिला विद्यालय निरीक्षक लखनऊ के पद पर रहे राकेश कुमार ने मिलीभगत और वसूली के चलते उसकी फाइल को आगे ही नहीं बढ़ाया था, अब जब भ्रष्ट राकेश कुमार पाड़े का ट्रांसफर देवीपाटन मंडल के डीडीआर पद पर होने के बावजूद जॉइंट डायरेक्टर का चार्ज मिल गया है, तब जाकर ललित श्रीवास्तव की फाइल अधिकारियों की टेबल पर दौड़ने लगी है।
पत्नी के ऐडेड स्कूल में ही खोल लिया फर्जी प्राइवेट स्कूल
लखनऊ। चपरासी से क्लर्क और फिर बसपा कार्यकाल में क्लर्क से माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का सदस्य रहा ललित श्रीवास्तव फर्जीवाड़े में उस्ताद है। उसने अपने घर परिवार के दो दर्जन से अधिक लोगों को एडेड और राजकीय इंटर कॉलेज में दे रखी है, और हर महीना वेतन से वसूली जारी रखे हुए है। ललित श्रीवास्तव ने तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश त्रिपाठी से मिलीभगत करके लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज के मैनेजमेंट पर कब्जा जमाया और इस कॉलेज को बर्बाद करते हुए अपनी पत्नी श्रीमती निशा श्रीवास्तव को ही प्रिंसिपल बनवा दिया है। लालबाग में उमेश त्रिपाठी और तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा प्रमुख सचिव की मिलीभगत से एक दर्जन से अधिक फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति करा दी, जिसमें अधिकतर का वेतन भुगतान चोरी चुपके कॉविड-19 के दौरान मिलीभगत से होना शुरू हो गया था। इसी बीच मौका पाकर लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज के केमिस्ट्री लैब को तुड़वाकर उसमें एक प्राइवेट स्कूल खोल दिया और इस प्राइवेट स्कूल से लाखों रुपए की अवैध कमाई अधिकारियों की मिली भगत से हो रही है। पिछली बार शिकायत की जांच तत्कालीन ज्वाइन्ट डायरेक्टर सुरेंद्र तिवारी ने की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट कहां छिपा दी गई कुछ पता नहीं और फर्जी कागजों पर बदस्तूर स्कूल जारी है। मजेदार बात है कि शिक्षा भवन के बेसिक शिक्षा अधिकारी, एडी बेसिक के क्लर्क हो या डीआईओएस और ज्वाइंट डायरेक्टर विभाग के कुछ खास क्लर्क सभी अंदर ही अंदर शिक्षा माफिया बनाने में उसकी पूरी मदद करते हैं।